इलेक्ट्रिक व्हीकल से अब घर में बिजली: IIT बॉम्बे की तकनीक से बिल में 30% कमी
IIT बॉम्बे की ग्रिड इंटीग्रेशन लैब ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे इलेक्ट्रिक कार की बैटरी से घर में बिजली सप्लाई की जा सकेगी, केरल से शुरुआत हुई है।
अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का इस्तेमाल सिर्फ यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि घर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए भी किया जा सकेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल से बिजली सप्लाई की यह नई तकनीक देश में पहली बार सामने आई है, जिसे IIT बॉम्बे की ग्रिड इंटीग्रेशन लैब द्वारा विकसित किया गया है।
इस तकनीक की शुरुआत केरल से की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस प्रणाली के उपयोग से बिजली बिल में 30 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। यह नवाचार ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
तकनीक का आधार और प्रयोग
IIT बॉम्बे के कैंपस में इस तकनीक पर तीन साल तक गहन प्रयोग किए गए। ग्रिड इंटीग्रेशन लैब के विशेषज्ञों ने इस दौरान सौर ऊर्जा और वाहन की बैटरी के तालमेल पर काम किया।
प्रयोग के दौरान दिन के समय इलेक्ट्रिक कार को सोलर पैनल के माध्यम से चार्ज किया जाता था। इसके बाद रात के समय उसी बैटरी का उपयोग घर के बिजली उपकरणों को चलाने के लिए किया गया, जिससे ग्रिड पर निर्भरता कम हुई।
उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा
इस तकनीक के मुख्य लाभ में बिजली की लागत में सीधी कटौती शामिल है। चूंकि वाहन की बैटरी का उपयोग रात में बिजली स्रोत के रूप में किया जा सकता है, इसलिए पारंपरिक बिजली ग्रिड की खपत कम हो जाती है।
यह प्रणाली विशेष रूप से उन उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी है जिनके पास सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक कार दोनों उपलब्ध हैं। इससे ऊर्जा का दोहरा उपयोग सुनिश्चित होता है और बिजली खर्च में बचत होती है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- IIT बॉम्बे की ग्रिड इंटीग्रेशन लैब ने इस तकनीक को विकसित किया है।
- केरल में इस नई बिजली सप्लाई प्रणाली की शुरुआत की गई है।
- इलेक्ट्रिक कार की बैटरी का उपयोग घर की बिजली जरूरतों के लिए होगा।
- प्रयोगों में बिजली बिल में 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
- दिन में सोलर पैनल से कार चार्ज होगी और रात में घर को बिजली मिलेगी।
भविष्य और ऊर्जा प्रबंधन
यह तकनीक ऊर्जा संरक्षण के नए रास्ते खोलती है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल का उपयोग मोबाइल पावर बैंक की तरह किया जा सकेगा, जो न केवल वाहन मालिकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।
इस तकनीक के व्यापक स्तर पर लागू होने से देश में बिजली की मांग और आपूर्ति के संतुलन में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।





