भारत के खिलाफ जॉन कैंपबेल का तूफानी शतक: 65 गेंदों में रचा इतिहास
वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने भारत के खिलाफ दूसरे वनडे में महज 65 गेंदों पर तूफानी शतक जड़कर मैदान पर धमाकेदार वापसी की।
वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने भारत के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में आक्रामक अंदाज दिखाते हुए शानदार शतकीय पारी खेली। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ते हुए महज 65 गेंदों में अपना शतक पूरा किया।
लंबे समय तक मैदान से दूर रहने के बाद इस कैरेबियाई बल्लेबाज की यह पारी क्रिकेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। श्रृंखला के दूसरे मैच में इस पारी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।
मैदान पर कैंपबेल का आक्रामक रुख
पारी की शुरुआत से ही उन्होंने क्रीज पर बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों के खिलाफ उन्होंने मैदान के चारों तरफ करारे प्रहार किए।
केवल 65 गेंदों में तिहरे अंक तक पहुंचकर उन्होंने साबित कर दिया कि सीमित ओवरों के प्रारूप में उनकी आक्रामकता कितनी घातक साबित हो सकती है। पिछले मैच में भी उन्होंने शानदार अर्धशतक जमाया था।
विवादों और 22 महीने के निलंबन के बाद वापसी
इस धाकड़ बल्लेबाज का सफर आसान नहीं रहा है। डोपिंग जांच के दौरान रक्त का नमूना देने से इनकार करने के चलते वेस्टइंडीज क्रिकेट ने उन पर 22 महीने का लंबा प्रतिबंध लगाया था।
निलंबन का समय पूरा करने के बाद टीम में लौटे इस खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब दिया है। भारतीय गेंदबाजों के सामने उनकी यह पारी उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- जॉन कैंपबेल ने भारत के खिलाफ दूसरे वनडे में महज 65 गेंदों पर शतक पूरा किया।
- इस मुकाबले से पहले भी उन्होंने भारतीय टीम के खिलाफ बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली थी।
- ब्लड सैंपल न देने के विवाद के चलते उन पर 22 महीने का प्रतिबंध लगा था।
- निलंबन समाप्त होने के बाद वेस्टइंडीज टीम में वापसी करते ही उन्होंने अपना आक्रामक रूप दिखाया।
- उनकी इस तेजतर्रार पारी ने दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया।
अब आगे क्या
भारतीय टीम के लिए एकदिवसीय श्रृंखला के शेष हिस्से में इस सलामी बल्लेबाज पर लगाम लगाना सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गया है। उनकी यह आक्रामकता विरोधी खेमे के लिए नई सिरदर्दी साबित हो रही है।
कैंपबेल के इस शानदार फॉर्म से वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी इकाई को शीर्ष क्रम में जबरदस्त स्थिरता और तेज शुरुआत मिलने की पूरी उम्मीद बंधी है।
निष्कर्ष
विवादों और 22 महीने के लंबे वनवास के बाद क्रिकेट की मुख्यधारा में लौटना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। जॉन कैंपबेल ने मैदान पर बल्ले से रन बनाकर न सिर्फ अपनी प्रतिभा को साबित किया है, बल्कि कैरेबियाई क्रिकेट में अपनी अहमियत भी फिर दर्ज कराई है।





