मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के वास्तु नियम: जानें दिशा, सही समय और सही तेल
घर के मुख्य द्वार पर रोजाना दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है; सही दिशा, सही समय और घी या तेल के इस्तेमाल के नियम जानें।
सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना बेहद शुभ माना गया है। मुख्य द्वार को लक्ष्मी का आगमन द्वार कहा जाता है, इसलिए यहाँ जलाया गया दीया नकारात्मक ऊर्जा को बाहर रखता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही विधि और सही दिशा में दीपक जलाने से ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।
अक्सर लोग दीया जलाते समय छोटी-छोटी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिससे इसका सही लाभ नहीं मिल पाता। जानिए मुख्य द्वार पर दीपक प्रज्वलित करने के सही नियम और धार्मिक मान्यताएँ।
दीपक जलाने का सही समय और तरीका
शाम के समय यानी गोधूलि बेला में दीपक जलाना सबसे उत्तम माना जाता है। सूर्यास्त के ठीक बाद का समय लक्ष्मी जी के आगमन का समय माना जाता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दीये को सीधे जमीन पर न रखें। जमीन पर थोड़ा सा अक्षत (चावल), रोली या फूल रखकर उसके ऊपर ही दीपक स्थापित करें।
दीपक जलाने के बाद उसकी लौ को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ होता है। पश्चिम दिशा की तरफ लौ रखने से आर्थिक नुकसान हो सकता है, जबकि दक्षिण दिशा की तरफ लौ रखना केवल पितरों के निमित्त दीया जलाते समय ही उचित माना जाता है।
तेल या घी: किसका दीपक जलाना चाहिए?
घर के मुख्य द्वार पर घी और तेल दोनों प्रकार के दीपक जलाए जा सकते हैं, लेकिन दोनों का महत्व अलग-अलग है।
गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और घर का वातावरण शुद्ध होता है। घी का दीया हमेशा बाईं तरफ (घर से बाहर निकलते समय) रखना चाहिए। वहीं, सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव और राहु-केतु के दोष शांत होते हैं। तेल का दीपक घर से बाहर निकलते समय दाहिनी तरफ रखना शुभ माना गया है।
दीपक की सही दिशा और नियम
मुख्य द्वार पर दीपक रखते समय दिशा का सही ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। जब आप घर से बाहर निकल रहे हों, तो दीपक आपके दाहिने हाथ (Right Side) की ओर होना चाहिए।
वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार का दाहिना हिस्सा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। यहाँ दीपक रखने से नकारात्मक शक्तियां घर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाती हैं और परिवार के सदस्यों की प्रगति के मार्ग खुलते हैं।
मुख्य बातें एक नज़र में
- दीपक को गोधूलि बेला यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद जलाना चाहिए।
- दीये को कभी भी सीधे भूमि पर न रखें, उसके नीचे चावल या फूल रखें।
- घर से बाहर निकलते समय दीपक आपके दाहिने हाथ की तरफ होना चाहिए।
- घी का दीपक जला रहे हैं तो रुई की बत्ती (खड़ी बत्ती) का प्रयोग करें।
- सरसों या तिल के तेल के दीपक में लाल धागे (कलावा) की बत्ती का उपयोग शुभ होता है।
- खंडित या टूटे हुए दीपक का उपयोग पूजा या मुख्य द्वार पर कभी न करें।
वास्तु दोष दूर करने के अन्य उपाय
मुख्य द्वार पर रोजाना नियमित रूप से दीपक जलाने से घर के कई प्रकार के वास्तु दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। यदि घर में अक्सर क्लेश रहता हो या धन की कमी महसूस होती हो, तो शाम के समय सरसों के तेल में थोड़ा सा तिल मिलाकर मुख्य द्वार पर जलाएं।
दीपक जलाने के बाद ध्यान रखें कि वह हवा से तुरंत न बुझे। इसके लिए दीये को किसी कांच के कवर या सुरक्षित स्थान पर रखें। नियमित रूप से यह नियम अपनाने से घर में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।





