हर मेडिकल स्टोर पर CCTV जरूरी: सरकार का कड़ा नियम, बिना पर्ची दवा बेचना मुश्किल
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स 1945 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत सभी मेडिकल स्टोर्स पर अब सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य होगा।
देशभर के मेडिकल स्टोर पर अब सरकार की पैनी नजर रहेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता लाने और गैर-कानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत, सभी मेडिकल स्टोर्स के लिए सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला खासकर उन दुकानों पर शिकंजा कसेगा जो बिना डॉक्टर की पर्ची के धड़ल्ले से दवाएं बेचती हैं, खासकर एंटीबायोटिक्स और शेड्यूल एच की दवाएं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को इस संबंध में एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इसमें ड्रग्स रूल्स 1945 में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल और मनमानी बिक्री पर रोक लगाना है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं कि कई मेडिकल स्टोर बिना वैध डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक्स और अन्य गंभीर दवाएं बेच रहे हैं। इससे न सिर्फ मरीजों की सेहत को खतरा होता है, बल्कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। सरकार का मानना है कि सीसीटीवी की निगरानी से इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
इस नियम के लागू होने के बाद, अगर कोई मेडिकल स्टोर बिना पर्ची के दवा बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सबूत जुटाना आसान होगा। यह कदम दवा वितरण प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
प्रस्तावित बदलावों के तहत, मेडिकल स्टोर को अपने परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, जो कम से कम 30 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रख सकें। यह रिकॉर्डिंग लाइसेंसिंग अथॉरिटी या किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध करानी होगी। इस नियम का पालन न करने पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है या उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, शेड्यूल एच की दवाओं की बिक्री को लेकर भी नियम सख्त किए जाएंगे। इन दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के बेचना अब लगभग नामुमकिन हो जाएगा, क्योंकि हर बिक्री कैमरे में कैद होगी।
मुख्य बातें एक नज़र में
- सभी मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य होगा।
- सीसीटीवी रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी।
- बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा बेचने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- खासकर एंटीबायोटिक्स और शेड्यूल एच की दवाओं पर विशेष निगरानी।
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को मसौदा अधिसूचना जारी की।
- नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है या जुर्माना लगेगा।
दवाओं के दुरुपयोग पर लगेगी लगाम
इस नए नियम से दवाओं के दुरुपयोग पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है। कई बार लोग छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी सीधे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स खरीद लेते हैं, जिससे उनके शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विकसित हो जाता है। यह भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज को और मुश्किल बना देता है। सीसीटीवी की निगरानी से इस तरह की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।
यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और दवा बिक्री में नैतिक मानदंडों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। दवा विक्रेताओं को भी अब अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।
निष्कर्ष
स्वास्थ्य मंत्रालय का यह प्रस्ताव दवा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगा। सभी मेडिकल स्टोर मालिकों को इन नए नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उम्मीद है कि इन सख्त कदमों से दवाओं की मनमानी बिक्री पर रोक लगेगी और मरीजों को सही दवाएं सही तरीके से मिल सकेंगी।





