पितृपक्ष 2026: श्राद्ध के दिन बाल और दाढ़ी कटवाने पर क्या है नियम?
पितृपक्ष 2026 में श्राद्ध की तिथि पर दाढ़ी-बाल बनवाने से परहेज की मान्यता है, धर्म सिंधु ग्रंथ में क्षौर कर्म को लेकर स्पष्ट नियम मिलता है।
पितृपक्ष 2026 के दौरान पूर्वजों के तर्पण और अनुष्ठान से जुड़े नियमों का पालन किया जाता है। परंपराओं के मुताबिक श्राद्ध की तिथि पर केश और दाढ़ी कटवाने की मनाही बताई गई है।
धार्मिक अनुष्ठानों के समय आचरण की शुद्धता और निषेधों को लेकर समाज में मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनका पालन श्रद्धालु करते हैं।
शास्त्रों और जानकारों का मत
आचार्य मदन मोहन बताते हैं कि धर्म सिंधु ग्रंथ में भी श्राद्ध दिवस पर क्षौर कर्म न करने का निर्देश दिया गया है।
इस संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया है कि विशेष रूप से श्राद्ध की तय तिथि पर यह संयम बरतना आवश्यक है।
मांगलिक कार्यों पर भी रोक
इस पूरी कालावधि में शुभ व मांगलिक प्रसंगों को करने की भी मनाही मानी जाती है।
पूर्वजों की स्मृति के दिनों में किसी भी प्रकार के नए उत्सव या मांगलिक आयोजन वर्जित श्रेणी में आते हैं।
मुख्य बातें एक नज़र में
- पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथि पर बाल और दाढ़ी कटवाने से बचने का नियम है।
- आचार्य मदन मोहन के अनुसार धर्म सिंधु में क्षौर कर्म न करने का उल्लेख है।
- इस अवधि में मांगलिक कार्यों को भी वर्जित माना गया है।
परंपरा और नियमों का असर
श्राद्ध कर्म के दौरान इन वर्जनाओं का ध्यान रखकर ही विधि-विधान पूरा किया जाता है, जिससे धार्मिक मान्यताओं की मर्यादा बनी रहे।





