पितृ पक्ष 2026: 27 सितंबर से 16 दिन चलेंगे श्राद्ध, पूर्वजों की आत्मा को मिलेगी शांति
साल 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 16 दिनों तक चलेंगे, जिसमें पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व होगा।
हर साल आने वाला पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पवित्र अवसर होता है। साल 2026 में यह पावन पर्व 27 सितंबर से शुरू होकर 16 दिनों तक चलेगा। इस दौरान परिवार के सदस्य अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, जिनमें श्राद्ध और तर्पण प्रमुख हैं।
मान्यता है कि पितृ पक्ष में किए गए कर्मों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह समय पूर्वजों के ऋण से मुक्ति पाने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कब से कब तक चलेगा पितृ पक्ष 2026?
साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से होगी। यह सिलसिला पूरे 16 दिनों तक चलेगा और 12 अक्टूबर, सोमवार को समाप्त होगा, जिसे सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इन सोलह दिनों में अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
हर तिथि का अपना विशेष महत्व होता है और उसी तिथि के अनुसार दिवंगत व्यक्ति का श्राद्ध करना फलदायी माना जाता है। इस दौरान दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज का भी विशेष विधान है।
श्राद्ध और तर्पण के शुभ मुहूर्त
पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण के लिए कुछ विशेष मुहूर्त बताए गए हैं। कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल में श्राद्ध कर्म करना सबसे उत्तम माना जाता है। इन मुहूर्तों में किए गए कर्मों का फल सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है।
तर्पण के लिए सुबह का समय उपयुक्त होता है, जब सूर्योदय के बाद पूर्वजों को जल अर्पित किया जाता है। श्राद्ध कर्म दोपहर के समय किए जाते हैं, जिसमें पिंडदान और ब्राह्मणों को भोजन कराना शामिल है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से होगी।
- यह पावन पर्व 16 दिनों तक चलेगा।
- समाप्ति 12 अक्टूबर, सोमवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगी।
- पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किए जाते हैं।
- कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त श्राद्ध के लिए शुभ माने गए हैं।
- तर्पण सुबह के समय किया जाता है।
- दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व है।
पूर्वजों को प्रसन्न करने के उपाय
पितृ पक्ष में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इसमें ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को दान देना, गायों को चारा खिलाना और पितरों के नाम से दीपक जलाना शामिल है। इन सभी कार्यों से पूर्वज तृप्त होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, इस अवधि में पितृ स्तोत्र का पाठ करना और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इन धार्मिक क्रियाओं से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
निष्कर्ष
साल 2026 का पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक चलेगा, जो पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक सुनहरा अवसर है। इस दौरान विधि-विधान से किए गए श्राद्ध और तर्पण से न केवल पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार में भी सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। सभी को इन 16 दिनों का सदुपयोग अपने पूर्वजों के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करना चाहिए।





