वैशाली: अस्पताल में युवक की मौत, एंबुलेंस नहीं मिली तो ठेले पर ले गए शव
वैशाली के लालगंज में 31 वर्षीय युवक की मौत के बाद शव वाहन नहीं मिलने पर परिजन उसी हाथ ठेले पर पार्थिव शरीर ले जाने को विवश हुए जिस पर अस्पताल लाए थे।
वैशाली | बिहार के वैशाली जिले अंतर्गत लालगंज में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद स्तब्ध करने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल में उपचार के दौरान 31 वर्षीय मोनू कुमार की जान चली गई, लेकिन इसके बाद परिवार को पार्थिव शरीर घर पहुंचाने के लिए कोई भी वाहन नसीब नहीं हुआ।
लालगंज के इस मामले में वैशाली स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर हुई है, जहां परिजनों को अंततः उसी हाथ ठेले का सहारा लेना पड़ा जिस पर लादकर वे बीमार युवक को अस्पताल लाए थे।
मौके पर क्या हुआ
लालगंज निवासी मोनू कुमार की तबीयत बिगड़ने पर परिजन आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आवागमन का उचित साधन न होने पर परिवार ने मरीज को हाथ ठेले पर लिटाया और अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद 31 वर्षीय युवक को बचाया नहीं जा सका और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
शव वाहन नहीं मिलने से बढ़ी लाचारी
युवक के निधन के बाद परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र परिसर में एंबुलेंस अथवा शव वाहन की तलाश की। अस्पताल परिसर में मृतक के परिजनों को शव ले जाने के लिए कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
काफी देर तक इंतजार और साधन की अनुपलब्धता के बाद असहाय परिजनों ने भारी मन से वही पुराना रास्ता चुना। परिजन उसी हाथ ठेले पर मोनू के शव को रखकर घर की ओर रवाना हो गए।
मुख्य बातें एक नज़र में
- घटना बिहार के वैशाली जिले के लालगंज क्षेत्र की है।
- मृतक की पहचान 31 वर्षीय मोनू कुमार के रूप में हुई।
- परिजनों ने बीमार युवक को हाथ ठेले पर रखकर अस्पताल पहुंचाया था।
- इलाज के दौरान अस्पताल में 31 वर्षीय युवक की मौत हो गई।
- निधन के बाद पार्थिव शरीर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला।
- विवश होकर परिजन शव को दोबारा हाथ ठेले पर रखकर घर ले गए।
व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सरकारी दावों के बीच इस वाकये ने साफ कर दिया कि सुदूर कस्बों में बुनियादी एंबुलेंस सुविधाएं जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। लालगंज का यह वाकया वैशाली स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को रेखांकित करता है।
जिस ठेले पर जिंदगी बचाने की उम्मीद में एक नौजवान को लाया गया था, उसी ठेले पर उसकी लाश का लौटना पूरी व्यवस्था की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।





