तख्तापलट पर रामदेव: 'भारत में नहीं होगा', नेताओं को सद्बुद्धि की दुआ
कनखल में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में तख्ता पलट की गुंजाइश नहीं है और नेताओं के बयानों पर भगवान सद्बुद्धि दें।
रामदेव तख्तापलट बयान इन दिनों चर्चा में है। कनखल | योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल या मध्य पूर्व के देशों की तरह तख्ता पलट नहीं होने वाला। बुधवार को पतंजलि योगपीठ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों पर सवाल पूछा गया तो रामदेव ने कहा कि आजकल के नेता जैसे बयान दे रहे हैं, उसे देखते हुए भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें या उनकी सद्गति दें।
मौके पर क्या कहा
रामदेव ने कहा कि भारत में तख्ता पलट और बगावत की कोई गुंजाइश नहीं है। कुछ लोगों के मन में ऐसे ख्वाब हो सकते हैं, पर बदलाव का रास्ता संविधान और चुनाव से होकर गुजरता है।
उन्होंने देश की व्यवस्थाएं गिनाईं: लोकतंत्र, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस और न्यायालय। उनके मुताबिक पुलिस और न्यायपालिका अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, इसलिए असंवैधानिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की कल्पना उचित नहीं।
रामदेव ने कहा कि जिन्हें सत्ता में आना है, वे लोकतांत्रिक तरीके से आ सकते हैं। सड़कों पर उतरकर सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
सनातन और देवी-देवताओं पर रुख
रामदेव ने कहा कि सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, जीवन जीने की समग्र पद्धति है। उनके अनुसार वेदों में भेदभाव नहीं, मानवता के कल्याण का संदेश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म और देवी-देवताओं को बदनाम करने के लिए तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। उन्होंने श्रीराम और माता सीता को मांसाहार और शराब से जोड़ने, श्रीकृष्ण के महारास को दोषपूर्ण रूप में पेश करने और शिव को नशे से जोड़ने का जिक्र किया।
जाति पर उन्होंने कहा कि सनातन में सभी समान हैं। दलित का अपमान उतना ही अनुचित है, जितना ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य का।
मुख्य बातें एक नज़र में
- रामदेव ने कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल जैसा तख्ता पलट नहीं होगा।
- सत्ता का रास्ता संविधान और चुनाव से होकर जाता है, सड़कों से नहीं।
- नेताओं के बयानों पर उन्होंने कहा, भगवान सद्बुद्धि दें या सद्गति दें।
- बयान बुधवार को कनखल के पतंजलि योगपीठ में दिया गया।
- सनातन में सभी जातियों को समान सम्मान मिलना चाहिए, उन्होंने कहा।
अब आगे क्या
रामदेव ने बताया कि 30 अक्तूबर से पतंजलि योगपीठ में भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 52वां सम्मेलन होगा। इसमें विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि और विद्वान शामिल होंगे।
सम्मेलन में सनातन के कथित अपमान और भारतीय परंपराओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण इस मौके पर मौजूद रहे।





