खड़े हनुमान मंदिर में रात को प्रतिमा की स्कैनिंग, नींव की गहराई नापी गई
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में मंगलवार देर शाम प्रशासनिक टीम ने मशीनों से प्रतिमा के नीचे की संरचना जांची; भाजपा पार्षद ने तरीके पर सवाल उठाए।
खड़े हनुमान मंदिर में मंगलवार की देर शाम प्रशासनिक टीम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ पहुंची। टीम ने प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की स्कैनिंग की। मकसद था यह पता लगाना कि प्रतिमा का आधार जमीन में कितना नीचे तक जाता है और उसके नीचे ढांचा कैसा है।
मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद यह जांच हुई है। प्रतिमा आगे हटाई जाएगी या नहीं, इस पर प्रशासन ने अब तक स्थिति साफ नहीं की है।
मौके पर हालात
स्मार्ट सिटी से मिली जानकारी के मुताबिक अधिकारियों की टीम करीब एक से डेढ़ घंटे मंदिर में रुकी। इस दौरान अलग-अलग तरीकों से प्रतिमा की स्कैनिंग की गई।
मुख्य ढांचा हटने के बाद प्रतिमा की सुरक्षा के लिए उसके ऊपर कैनोपी यानी टेंट लगाया गया है। कुछ श्रद्धालु इसकी तुलना अयोध्या में राम मंदिर बनने से पहले टेंट में विराजमान भगवान राम से कर रहे हैं।
पार्षद ने उठाए सवाल
भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने देर रात जांच कराने के तरीके पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जांच करनी ही है तो सबके सामने, पारदर्शी तरीके से हो। बिना सार्वजनिक जानकारी के रात के अंधेरे में टीम के पहुंचने से श्रद्धालुओं में भ्रम और आशंका है। उन्होंने प्रशासन से अपनी मंशा साफ करने की मांग की।
तिवारी ने दावा किया कि कुछ जगह उपकरण लगाने के बाद उनकी बैटरी अचानक डिस्चार्ज हो गई और अधिकारियों को उन्हें दोबारा चार्ज करना पड़ा। उन्होंने इसे भगवान का संकेत बताया।
अब तक का घटनाक्रम
मंदिर हटाने की कार्रवाई 30 अगस्त 2026 को शुरू करने का प्रयास हुआ, पर श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों के विरोध से रोकनी पड़ी। 1 सितंबर को टीम फिर पहुंची और करीब 16 घंटे की कार्रवाई में शिखर व ऊपरी हिस्सा हटाया गया। 4 सितंबर को मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया।
प्रशासन की योजना करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को टंकी चौक के पास बने नए मंदिर में स्थापित करने की थी। 5 से 7 सितंबर के बीच डेढ़ फीट खुदाई के बाद भी आधार नहीं मिला और प्रतिमा नहीं हिली। 8 सितंबर को वैज्ञानिक जांच का निर्णय हुआ।
9 सितंबर को प्रशासन ने कहा कि आम सहमति और प्रतिमा की सुरक्षा के बिना कार्रवाई नहीं होगी। 15 सितंबर को आईआईटी इंदौर की टीम ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से प्रतिमा के नीचे की संरचना स्कैन की।
मुख्य बातें एक नज़र में
- मंगलवार देर शाम प्रशासनिक टीम ने मशीनों से प्रतिमा की स्कैनिंग की
- टीम करीब एक से डेढ़ घंटे मंदिर में रही
- प्रतिमा करीब 8 फीट ऊंची है; डेढ़ फीट खुदाई में भी आधार नहीं मिला
- 15 सितंबर को आईआईटी इंदौर ने जीपीआर से स्कैनिंग की थी
- प्रतिमा हटाने पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की
अब आगे क्या
श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रतिमा को मूल स्थान पर सुरक्षित रखकर जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए। स्कैनिंग के नतीजे और प्रतिमा को लेकर प्रशासन का अगला कदम अभी सामने आना बाकी है।





