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इंजीनियरिंग छोड़ी, डेढ़ साल अस्पताल में रहे, फिर बने पटना के टॉप CA: अभिषेक मिश्रा की कहानी

27 सितंबर 2026 153 1 मिनट
इंजीनियरिंग छोड़ी, डेढ़ साल अस्पताल में रहे, फिर बने पटना के टॉप CA: अभिषेक मिश्रा की कहानी

पटना के अभिषेक मिश्रा ने इंजीनियरिंग छोड़कर सीए बनने का मुश्किल सफर तय किया, तमाम बाधाओं के बावजूद सफलता हासिल कर मिसाल कायम की है।

बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अभिषेक मिश्रा, जिन्होंने इंजीनियरिंग की तैयारी छोड़कर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने का कठिन रास्ता चुना, आज पटना के जाने-माने सीए में से एक हैं। उनकी यह यात्रा चुनौतियों और संघर्षों से भरी रही, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अभिषेक की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी-जान लगा देते हैं, भले ही रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएं। उन्होंने न केवल अपनी बीमारी से जंग जीती, बल्कि लोगों के तानों का जवाब अपनी सफलता से दिया।

शुरुआत में इंजीनियरिंग का सपना

अभिषेक मिश्रा ने शुरुआत में इंजीनियरिंग को अपना करियर बनाने का सोचा था। उन्होंने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि यह क्षेत्र उनके लिए नहीं है। अपने दिल की सुनकर उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया — इंजीनियरिंग छोड़कर चार्टर्ड अकाउंटेंसी की दुनिया में कदम रखने का। यह फैसला उनके परिवार और दोस्तों के लिए थोड़ा चौंकाने वाला था।

अभिषेक ने अपनी लगन से सीए की पढ़ाई शुरू की। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि इसमें गहन अध्ययन और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा इस नए लक्ष्य को समर्पित कर दी।

डेढ़ साल अस्पताल में गुजारे, फिर भी नहीं डिगे

सीए की पढ़ाई के दौरान अभिषेक के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई। वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और उन्हें लगभग डेढ़ साल तक अस्पताल में बिताना पड़ा। यह किसी भी छात्र के लिए बेहद मुश्किल समय होता है, जब पढ़ाई से दूर रहना पड़ता है और भविष्य अनिश्चित लगने लगता है। इस दौरान उन्हें कई लोगों के ताने भी सुनने पड़े, जिन्होंने कहा कि उनसे यह नहीं हो पाएगा।

लेकिन अभिषेक ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। अस्पताल में रहते हुए भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। अपनी बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ पढ़ाई फिर से शुरू की और यह साबित कर दिया कि शारीरिक बाधाएं भी उनके सपनों को रोक नहीं सकतीं।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • अभिषेक मिश्रा ने इंजीनियरिंग की तैयारी छोड़कर सीए बनने का फैसला किया।
  • सीए की पढ़ाई के दौरान उन्हें डेढ़ साल अस्पताल में बिताना पड़ा।
  • लोगों के तानों और नकारात्मक टिप्पणियों का सामना किया।
  • बीमारी से उबरने के बाद दोगुनी मेहनत से पढ़ाई की।
  • आज वे पटना के सफल और प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट में से एक हैं।
  • उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

संघर्ष के बाद मिली सफलता

अभिषेक की मेहनत और दृढ़ता रंग लाई। उन्होंने सीए की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की और आज वे पटना के सर्वश्रेष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट में से एक माने जाते हैं। उनका नाम उन चुनिंदा पेशेवरों में शुमार है, जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत के दम पर एक मुकाम हासिल किया है। वे अब कई कंपनियों और व्यक्तियों को वित्तीय सलाह देते हैं।

उनकी यह सफलता सिर्फ एक डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि उन सभी रूढ़ियों और बाधाओं को तोड़ना है जो अक्सर हमारे रास्ते में आती हैं। उन्होंने दिखाया कि अगर आपमें कुछ कर गुजरने का जुनून है, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।

निष्कर्ष

अभिषेक मिश्रा की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो अपने जीवन में बड़े सपने देखते हैं। उनका दृढ़ संकल्प, चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास यह सिखाता है कि सफलता अक्सर सबसे कठिन रास्तों से होकर गुजरती है। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा अपने सपनों का पीछा करना चाहिए।

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