अनंत चतुर्दशी 2026: रवि योग में आज व्रत, जानें पूजन मुहूर्त और अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी का पावन व्रत आज रवि योग के शुभ संयोग में रखा जा रहा है, जानें पूजन के विशेष मुहूर्त और अनंत सूत्र बांधने का धार्मिक महत्व।
आज अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है। इस वर्ष यह व्रत रवि योग के अत्यंत शुभ संयोग में पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह दिन विशेष रूप से अनंत सूत्र धारण करने के लिए भी जाना जाता है, जिसे सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
इस पर्व पर भगवान विष्णु के अनंत रूपों का ध्यान किया जाता है और विधि-विधान से पूजा संपन्न की जाती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और अनंत सूत्र धारण करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
रवि योग का शुभ संयोग और पूजन मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग का निर्माण एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग है। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को सभी प्रकार के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने वाला माना जाता है। इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं और उनका कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
पूजन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 06:00 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्त अपनी सुविधानुसार भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। दोपहर का समय विशेष रूप से पूजा के लिए अनुकूल माना जाता है, जब सूर्य अपने चरम पर होता है।
अनंत सूत्र का महत्व और धारण विधि
अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र धारण करना इस पर्व का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह सूत्र 14 गांठों वाला होता है, जो भगवान विष्णु के 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। इसे धारण करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह सभी प्रकार के संकटों से सुरक्षित रहता है।
पुरुष इसे अपने दाहिने हाथ में और महिलाएं अपने बाएं हाथ में धारण करती हैं। इसे धारण करने से पहले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सूत्र को अभिमंत्रित किया जाता है। माना जाता है कि यह सूत्र व्यक्ति को अनंत काल तक सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- अनंत चतुर्दशी का व्रत आज रवि योग के शुभ संयोग में।
- भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की होती है विशेष पूजा।
- पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से अगले दिन सुबह 06:00 बजे तक।
- अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा, जो 14 गांठों वाला होता है।
- पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं सूत्र।
- यह सूत्र सुरक्षा, सौभाग्य और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक है।
व्रत का धार्मिक महत्व और लाभ
अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने से भक्तों को कई धार्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह व्रत शारीरिक और मानसिक शुद्धता भी प्रदान करता है। जो भक्त सच्चे मन से इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। यह व्रत परिवार में खुशहाली लाने वाला भी माना जाता है।
निष्कर्ष
अनंत चतुर्दशी का पर्व हमें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की महिमा और उनके आशीर्वाद को स्मरण कराता है। रवि योग जैसे शुभ संयोग में यह व्रत और भी फलदायी हो जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे श्रद्धापूर्वक इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और अनंत सूत्र धारण कर अपने जीवन को सुखमय बनाएं। यह दिन हमें धैर्य, आस्था और समर्पण का संदेश भी देता है।





