बालाघाट के हिमांशु ने MPPSC में मारी बाजी: पिता बस कंडक्टर, बेटा बना प्रोफेसर
बालाघाट के हिमांशु कोलते ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा 2024 में 26वीं रैंक हासिल कर अपने बस कंडक्टर पिता का सपना साकार किया है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। उकवा क्षेत्र के सोनपुरी गांव के निवासी हिमांशु कोलते ने हाल ही में घोषित MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा 2024 के परिणामों में 26वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता एक निजी बस में कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं और उन्होंने दिन-रात मेहनत करके बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया।
हिमांशु की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं। उनके संघर्ष और लगन की कहानी अब हर जुबान पर है।
संघर्षों से भरी शिक्षा यात्रा
हिमांशु के पिता, श्री कोलते, पिछले कई वर्षों से एक प्राइवेट बस में कंडक्टर का काम कर रहे हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने हर संभव प्रयास किया ताकि हिमांशु को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिल सके।
हिमांशु ने भी अपने पिता की मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया और कड़ी मेहनत से इस मुकाम को हासिल किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
MPPSC में 26वीं रैंक: एक बड़ी उपलब्धि
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 26वीं रैंक हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है। यह परीक्षा प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें हजारों अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं। हिमांशु ने अपनी बुद्धिमत्ता और अथक प्रयास से यह सफलता प्राप्त की है।
उनकी इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। पिता की आँखों में बेटे की उपलब्धि पर गर्व साफ झलक रहा है। यह सिर्फ हिमांशु की ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की जीत है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- हिमांशु कोलते ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 26वीं रैंक प्राप्त की।
- वे बालाघाट जिले के उकवा क्षेत्र के सोनपुरी गांव के निवासी हैं।
- उनके पिता एक निजी बस में कंडक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
- सीमित संसाधनों के बावजूद हिमांशु ने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
- यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभावों में भी सपने देखते हैं।
- हिमांशु अब असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में प्रदेश की सेवा करेंगे।
स्थानीय लोगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हिमांशु की इस सफलता से सोनपुरी गांव और पूरे बालाघाट जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने हिमांशु और उनके परिवार को बधाई दी है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। कई लोग इसे शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिणाम बता रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी हिमांशु की इस उपलब्धि की सराहना की है। यह दर्शाता है कि सही दिशा और लगन से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
निष्कर्ष
हिमांशु कोलते की कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है। उनके पिता की मेहनत और उनका खुद का समर्पण रंग लाया है, और अब वे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देंगे। यह सफलता मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए एक नई राह खोलेगी और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।





