इंदौर में मिलावट पर सख्त कार्रवाई: 17 फर्मों पर 52 लाख का जुर्माना
इंदौर में एडीएम कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कड़ा फैसला सुनाते हुए 17 कारोबारी फर्मों पर कुल 52 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है।
इंदौर | खाद्य पदार्थों की शुद्धता और सुरक्षा मानकों को लेकर इंदौर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली 17 फर्मों पर एडीएम कोर्ट ने 52 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। इंदौर में मिलावट पर कार्रवाई के तहत सामने आया यह फैसला अमानक सामग्री बेचने वालों के लिए कड़ा संदेश है।
प्रशासन की जांच में अमानक, मिथ्याछाप और बिना वैध लाइसेंस के खाद्य सामग्री के निर्माण तथा विक्रय का मामला सामने आया था। इसके बाद कोर्ट ने नियमों की अनदेखी पर यह दंडात्मक कदम उठाया है।
प्रशासन की जांच में क्या गड़बड़ी मिली
जांच प्रक्रिया के दौरान कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तय नियमों की अवहेलना पाई गई थी। इसमें खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी।
इसके साथ ही कई मामलों में मिथ्याछाप यानी भ्रामक लेबलिंग और बिना आवश्यक लाइसेंस के कारोबार संचालित करने की बात प्रमाणित हुई। इनमें शहर की कई प्रमुख कारोबारी इकाइयां और कंपनियां शामिल पाई गईं।
एडीएम कोर्ट का कड़ा फैसला
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने सभी 17 फर्मों पर दोष सिद्ध होने पर कुल 52 लाख रुपये का अर्थदंड लगाने का निर्णय सुनाया।
लाइसेंस नियमों की अनदेखी और बाजार में अमानक उत्पाद उतारने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के मकसद से यह आर्थिक दंड तय किया गया है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- इंदौर एडीएम कोर्ट ने कुल 17 फर्मों पर लगाया आर्थिक दंड
- कारोबारियों पर कुल 52 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया
- अमानक और सब-स्टैंडर्ड खाद्य सामग्री के निर्माण-विक्रय का मामला
- उत्पादों पर मिथ्याछाप यानी गलत लेबलिंग का उल्लंघन पाया गया
- बिना वैध खाद्य लाइसेंस निर्माण और व्यापार करने पर हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पड़ा भारी
प्रशासन द्वारा की गई इस पड़ताल में सामने आया कि निर्माण से लेकर बिक्री तक के स्तर पर जरूरी सावधानियां नहीं बरती जा रही थीं। बिना वैध दस्तावेजों और मंजूरी के खाद्य इकाइयां संचालित की जा रही थीं।
गुणवत्ता मानकों से समझौता करने वाले कारोबारियों पर इस आर्थिक दंड के बाद खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की निगरानी और कड़ी रहने की संभावना है।





