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मध्यप्रदेश में घटेगी मातृ-शिशु मृत्यु दर: गर्भवती महिलाओं को मिलेगी 'जननी किट'

20 सितंबर 2026 5 1 मिनट
मध्यप्रदेश में घटेगी मातृ-शिशु मृत्यु दर: गर्भवती महिलाओं को मिलेगी 'जननी किट'

मध्यप्रदेश सरकार अब तमिलनाडु मॉडल अपनाकर मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए गर्भावस्था से पहले ही स्वास्थ्य सुधारने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

मध्यप्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए अब एक नई रणनीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए तमिलनाडु और केरल के सफल मॉडल का अध्ययन किया है। इसी तर्ज पर अब गर्भावस्था से पहले ही महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए एक विशेष जननी किट उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जो पोषण और आयुष पद्धतियों का संगम होगी।

यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत की जाएगी, जिसमें आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को भी शामिल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना है, ताकि मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।

क्यों ज़रूरी है यह बदलाव?

मध्यप्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गर्भावस्था के दौरान ही नहीं, बल्कि उससे पहले भी महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर होना बेहद ज़रूरी है। कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं अक्सर मातृ मृत्यु का कारण बनती हैं, जिन्हें गर्भावस्था से पहले ही दूर किया जा सकता है।

तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने इन समस्याओं से निपटने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जिसका श्रेय उनकी एकीकृत स्वास्थ्य नीतियों को दिया जाता है। इन्हीं राज्यों के अनुभवों से प्रेरणा लेकर मध्यप्रदेश अब अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर रहा है।

क्या होगी 'जननी किट' में?

नई 'जननी किट' में गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और आयुष से संबंधित स्वास्थ्य उत्पाद शामिल होंगे। इसका उद्देश्य महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली पोषण संबंधी कमियों को पूरा करना और उन्हें प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ रखना है।

यह किट महिलाओं को गर्भावस्था से पहले और उसके शुरुआती चरणों में प्रदान की जाएगी, ताकि उनके शरीर को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। आयुष पद्धतियों का समावेश महिलाओं को समग्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगा, जिससे दवाइयों पर निर्भरता कम होगी।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • मध्यप्रदेश सरकार तमिलनाडु-केरल मॉडल अपनाएगी।
  • मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर विशेष ध्यान।
  • गर्भावस्था से पहले महिलाओं का स्वास्थ्य सुधारने पर जोर।
  • 'जननी किट' के जरिए पोषण और आयुष का सहारा।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में आयुष का विलय।
  • कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद।
  • गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं।

प्रशासन की अगली तैयारी

इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और आयुष विभाग मिलकर काम करेंगे। आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इस किट के वितरण और महिलाओं को इसके उपयोग के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक यह सुविधा पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि इस नई पहल से न केवल मृत्यु दर कम हो, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी स्वस्थ हों। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का खाका तैयार हो चुका है और जल्द ही इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। तमिलनाडु और केरल के सफल अनुभवों से सीखकर एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देगा। 'जननी किट' और आयुष का समावेश महिलाओं को एक स्वस्थ गर्भावस्था सुनिश्चित करने में मदद करेगा, जिससे प्रदेश में एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण होगा।

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