UNSC वीटो पावर पर तुर्किये का बड़ा हमला: 5 देशों की मनमानी पर सवाल
तुर्किये ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति खत्म करने की मांग की है, जिससे वैश्विक बहस तेज हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यों को मिली वीटो पावर पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। तुर्किये ने इस विशेषाधिकार को खत्म करने की पुरजोर मांग की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई बहस छिड़ गई है। यह मुद्दा लंबे समय से वैश्विक राजनीति का केंद्र रहा है, जहां कई देश इस शक्ति के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
तुर्किये के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के दौरान अपने भाषण में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया 'पांच से बड़ी' है, जो सीधे तौर पर सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन) को मिली वीटो शक्ति पर निशाना था। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सुरक्षा परिषद की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
वीटो पावर पर क्यों उठ रहे सवाल?
वीटो पावर का मतलब है कि सुरक्षा परिषद का कोई भी स्थायी सदस्य किसी भी प्रस्ताव को रोक सकता है, भले ही बाकी सभी सदस्य उसे पारित करना चाहते हों। इस शक्ति का इस्तेमाल अक्सर अपने राष्ट्रीय हितों या सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए किया जाता है, जिससे कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर कार्रवाई रुक जाती है।
आलोचकों का तर्क है कि यह शक्ति संयुक्त राष्ट्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, जो समानता और सामूहिक निर्णय लेने पर आधारित हैं। उनका मानना है कि यह कुछ देशों को असीमित शक्ति देती है, जिससे परिषद की प्रभावशीलता कम होती है और यह बदलते वैश्विक परिदृश्य को प्रतिबिंबित नहीं करती।
बदलाव क्यों है इतना मुश्किल?
वीटो पावर को खत्म करना या इसमें बदलाव करना बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होगी, और किसी भी संशोधन को सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों की सहमति से पारित होना अनिवार्य है। स्वाभाविक रूप से, कोई भी स्थायी सदस्य अपनी शक्ति छोड़ने को आसानी से तैयार नहीं होगा।
इसके अलावा, वीटो शक्ति को खत्म करने से उन देशों के बीच भी नए सिरे से शक्ति संतुलन की बहस छिड़ सकती है जो स्थायी सदस्यता की दौड़ में हैं। भारत जैसे देश जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग कर रहे हैं, उनके लिए यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- तुर्किये ने UNSC के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति खत्म करने की मांग की।
- वीटो पावर 5 स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) के पास है।
- यह शक्ति किसी भी प्रस्ताव को रोकने का अधिकार देती है।
- आलोचकों का तर्क है कि यह वैश्विक समानता के खिलाफ है।
- चार्टर संशोधन के लिए सभी 5 स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है।
- भारत जैसे देश स्थायी सदस्यता के लिए इस बहस को अहम मानते हैं।
भारत और वैश्विक सुधार की उम्मीदें
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की वकालत करता रहा है, जिसमें स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना और वीटो पावर के इस्तेमाल को तर्कसंगत बनाना शामिल है। भारत का मानना है कि वर्तमान संरचना 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाती नहीं है और इसे अधिक समावेशी व प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता है।
वीटो पावर पर तुर्किये का बयान उन देशों की आवाज को मजबूत करता है जो बहुपक्षीय संस्थानों में अधिक न्यायसंगत व्यवस्था चाहते हैं। हालांकि, इस दिशा में कोई भी ठोस बदलाव लाना एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दबाव की अहम भूमिका होगी।
निष्कर्ष
वीटो पावर पर छिड़ी यह बहस संयुक्त राष्ट्र के भविष्य और वैश्विक शासन की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर कुछ देश इस शक्ति को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कई देश इसे अलोकतांत्रिक और अप्रभावी मानते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जटिल मुद्दे पर कोई आम सहमति बना पाता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार की दिशा में आगे बढ़ पाता है।





