साल में एक दिन खुलता है 160 साल पुराना मंदिर: बिलासपुर में दर्शन को कतार
बिलासपुर के जूना बिलासपुर स्थित हटरी चौक का सीताराम हनुमान मंदिर सिर्फ दशहरे पर खुलता है; सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक भक्त दर्शन कर रहे हैं।
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | जूना बिलासपुर के हटरी चौक में एक मंदिर ऐसा है, जिसके पट पूरे साल बंद रहते हैं। विजयादशमी के दिन ही यह श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। इस बार 20 अक्टूबर को सुबह 7 बजे पट खुलते ही दर्शन के लिए कतार लग गई।
करीब 160 साल पुराने सीताराम हनुमान मंदिर में श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाएँ विराजमान हैं। साल में एक ही दिन दर्शन मिलने से भक्त पूरे साल इस दिन का इंतज़ार करते हैं।
मौके पर हालात
सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालु अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे। परिसर में भक्ति का माहौल रहा। दर्शन का समय सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक तय किया गया है।
कोई मनोकामना लेकर पहुँचा, तो कोई बरसों पुरानी परंपरा निभाने और आशीर्वाद लेने आया।
नीम की जड़ों से प्रतिमाएँ निकलने की मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार, जहाँ आज मंदिर है, वहाँ पहले नीम का एक विशाल पेड़ था। समय के साथ पेड़ सूखकर गिर गया और कहा जाता है कि उसकी जड़ों से प्रतिमाएँ प्रकट हुईं।
इन प्रतिमाओं को स्थापित कर मंदिर बनवाया गया और विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा हुई। तब से पांडेय परिवार मंदिर का संचालन करता आ रहा है।
श्रद्धालुओं की बात
मान्यता है कि दशहरे के दिन यहाँ श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के दर्शन से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इसी कारण इसे मनोकामना पूर्ति मंदिर भी कहा जाता है।
वंदना यादव ने बताया कि वे कई साल से मंदिर के बारे में सुन रही थीं और इस बार पहली बार दर्शन का मौका मिला। रूपेंद्र यादव मंदिर की रील देखकर पहुँचे। विनोद कुमार देवांग ने भी भगवान के सामने अपनी मनोकामना रखी और उसके पूरा होने की आशा जताई।
मुख्य बातें एक नज़र में
- मंदिर जूना बिलासपुर के हटरी चौक में है और करीब 160 साल पुराना है।
- पट साल में सिर्फ विजयादशमी पर खुलते हैं।
- इस बार दर्शन का समय सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक रहा।
- मान्यता है कि प्रतिमाएँ सूखे नीम की जड़ों से प्रकट हुईं।
- मंदिर का संचालन पांडेय परिवार करता आ रहा है।
सोशल मीडिया से बढ़ी दिलचस्पी
मंदिर की अनूठी परंपरा की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है, जिससे लोगों में यहाँ पूजा-अर्चना करने की दिलचस्पी बढ़ी है। श्रद्धालु दूर-दूर से पहुँचते हैं और सुबह से कतार में लगकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अगले साल दशहरे पर ही ये पट फिर खुलेंगे।





