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एमपी को मिल सकती है पहली महिला DGP: प्रज्ञा ऋचा समेत तीन दावेदार

24 अक्टूबर 2026 139 1 मिनट
एमपी को मिल सकती है पहली महिला DGP: प्रज्ञा ऋचा समेत तीन दावेदार

मौजूदा DGP कैलाश मकवाना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं; UPSC को 12 नाम भेजे गए हैं और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव समेत तीन अफसर दौड़ में हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस की कमान पहली बार किसी महिला अफसर के हाथ में जा सकती है। होमगार्ड की DG प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव उन तीन अफसरों में हैं, जिनकी पहली महिला DGP की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

नए पुलिस मुखिया के लिए राज्य सरकार ने 12 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दिया है।

अब आगे क्या: नवंबर के पहले हफ्ते में फैसला

सूत्रों के मुताबिक, नवंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली में UPSC की उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है। इसमें तीन अफसरों का अंतिम पैनल तय होगा।

माना जा रहा है कि उसी दिन नए DGP के नाम का ऐलान भी हो सकता है। प्रज्ञा ऋचा के नाम पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुहर लगाते हैं, तो वे प्रदेश की पहली महिला DGP बनेंगी।

कौन हैं तीन दावेदार

प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (DG, होमगार्ड): उनका रिटायरमेंट फरवरी 2028 में है। DGP बनने पर सुप्रीम कोर्ट के दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के नियम के तहत वे नवंबर 2029 तक पद पर रहेंगी। उनके कार्यकाल में उज्जैन सिंहस्थ, विधानसभा और लोकसभा चुनाव पड़ेंगे।

वरुण कपूर (DG, जेल): वे वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं। रिटायरमेंट मई 2027 में है, पर DGP बनने पर कार्यकाल नवंबर 2028 तक रहेगा। इस दौरान उज्जैन सिंहस्थ और अगला विधानसभा चुनाव पड़ेगा।

उपेंद्र जैन (DG, EOW): आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ का लंबा अनुभव उनके पक्ष में जाता है। रिटायरमेंट अगस्त 2027 में है और चयन होने पर कार्यकाल नवंबर 2029 तक चलेगा, यानी सिंहस्थ, विधानसभा और लोकसभा चुनाव उनके कार्यकाल में भी पड़ेंगे।

पैनल में नाम के लिए शर्तें

  • राज्य सरकार ने UPSC को 12 वरिष्ठ IPS अफसरों के नाम भेजे हैं।
  • पैनल में उसी अफसर का नाम आ सकता है, जिसकी सामान्य सेवानिवृत्ति में कम से कम 6 महीने की सेवा बाकी हो।
  • सुप्रीम कोर्ट के 12 फरवरी 2026 के स्पष्टीकरण के मुताबिक, दावेदार के पास कम से कम 10 साल का कोर पुलिसिंग अनुभव होना जरूरी है।
  • पदभार लेने के बाद DGP को 2 साल का तय कार्यकाल मिलता है।
  • नवंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली में UPSC की बैठक प्रस्तावित है।

कानून-व्यवस्था, क्राइम ब्रांच/CID, EOW, इंटेलिजेंस, विजिलेंस या केंद्रीय जांच एजेंसियों में कुल मिलाकर यह अनुभव गिना जाता है।

कार्यकाल और दूसरे राज्यों की मिसाल

DGP को समय से पहले केवल तीन असाधारण हालात में हटाया जा सकता है: ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन एवं अपील) नियमों के तहत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई होने पर, आपराधिक या भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में अदालत से दोषसिद्धि होने पर, और शारीरिक या मानसिक रूप से जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ होने पर।

देश की पहली महिला DGP उत्तराखंड की कंचन चौधरी भट्टाचार्य थीं, जिन्हें 2004 में यह जिम्मेदारी मिली। 2010 में तमिलनाडु में लतिका सरन DGP बनीं। 2017 में गुजरात और कर्नाटक में भी महिला DGP नियुक्त हुईं।

2024 में रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र की पहली महिला DGP बनीं और जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक इस पद पर रहीं। अब नजर नवंबर के पहले हफ्ते की UPSC बैठक पर है, जहां तीन नामों का पैनल तय होगा।

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