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इसरो का NVS-03 आज रात 11:51 बजे: नाविक को मिलेगी नई ताकत

30 अक्टूबर 2026 165 1 मिनट
इसरो का NVS-03 आज रात 11:51 बजे: नाविक को मिलेगी नई ताकत

इसरो शुक्रवार रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी रॉकेट के ज़रिये नाविक के लिए NVS-03 उपग्रह छोड़ेगा, जनवरी 2025 की खराबी से सबक लेकर नई व्यवस्था अपनाई गई है।

श्रीहरिकोटा | भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को मज़बूत करने वाला NVS-03 उपग्रह आज रात अंतरिक्ष के लिए रवाना होगा। इसरो शुक्रवार (30 अक्टूबर) की रात 11 बजकर 51 मिनट पर इसे जीएसएलवी रॉकेट से छोड़ेगा। प्रक्षेपण 24 घंटे की उलटी गिनती के बाद होगा।

यह मिशन इसलिए खास है कि इसरो ने इस बार पिछली खराबी से बचने के लिए असामान्य तकनीकी व्यवस्था अपनाई है। साथ ही जीएसएलवी रॉकेट पर लगे 'नॉटी बॉय' के तमगे की भी परीक्षा होगी।

लॉन्च की तैयारी: रॉकेट और कक्षा

प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से होगा। उलटी गिनती गुरुवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर शुरू हुई थी।

रॉकेट पचास मीटर ऊंचा और तीन चरणों वाला है। प्रक्षेपण के समय इसका कुल वजन 420 टन होगा। इसे 2,232 किलोग्राम वजनी NVS-03 को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में पहुंचाना है।

इसरो की मिशन पुस्तिका के मुताबिक कक्षा में उपग्रह की पृथ्वी से निकटतम दूरी 170 किलोमीटर और सबसे अधिक दूरी 37,023 किलोमीटर रहेगी। कक्षा का झुकाव 20.75 डिग्री होगा।

पिछली खराबी से सबक: क्या बदला

इस बार उपग्रह के पायरो तकनीक से चलने वाले वाल्व प्रक्षेपण से पहले ही खुले रहेंगे। यह सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया से बड़ा बदलाव है, क्योंकि आमतौर पर तेज़ कंपन से ईंधन तंत्र को बचाने के लिए प्रणोदक की आपूर्ति अलग रखी जाती है।

इस व्यवस्था का मकसद जनवरी 2025 में NVS-02 मिशन के दौरान आई कनेक्टर की खराबी को दोहराने से रोकना है। उस खराबी की वजह से वह उपग्रह अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।

उच्चस्तरीय समिति के सुझाए सुधारात्मक उपाय भी इस प्रक्षेपण में पूरी तरह शामिल किए गए हैं। इनका उद्देश्य प्रणाली में वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ाना और पायरो प्रणाली को ज़्यादा भरोसेमंद बनाना है।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • प्रक्षेपण शुक्रवार रात 11:51 बजे, श्रीहरिकोटा के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से
  • तीन चरणों वाले रॉकेट का वजन 420 टन, ऊंचाई पचास मीटर
  • उपग्रह का वजन 2,232 किलोग्राम, लक्ष्य जीटीओ
  • उपग्रह एल1, एल5 और एस बैंड पर संकेत भेजेगा
  • अंतिम भू-स्थिर कक्षा 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर पर

NVS-03 की खूबियां और आगे की राह

NVS-03 नाविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) के लिए अहम उपग्रह है। इसमें स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर की बनाई स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी लगी है। एल1 बैंड जुड़ने से प्रणाली आधुनिक स्मार्टफोन के सिविलियन चिपसेट और पहनने योग्य उपकरणों के अनुकूल हो जाएगी।

जीटीओ में पहुंचने के बाद उपग्रह कई चरणों में कक्षीय गतिविधियां कर अपनी कक्षा ऊंची करेगा और फिर 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर पर अंतिम कक्षा में स्थापित होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि नाविक समूह को पूरी परिचालन क्षमता पाने और पूरे सेवा क्षेत्र में लगातार भरोसेमंद सेवा देने के लिए अभी काफी काम बाकी है। इसरो की नज़र जीएसएलवी एमके-2 के प्रदर्शन पर रहेगी, जिसे तीसरे चरण की क्रायोजेनिक जटिलताओं के कारण 'नॉटी बॉय' नाम मिला।

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