महाकाल मंदिर में धनतेरस पर महापूजा: चढ़ेगा चांदी का सिक्का
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के नंदी हॉल में शुक्रवार सुबह 9 बजे से धनतेरस की महापूजा शुरू हुई, जिसमें गणपति-महालक्ष्मी पूजन, रुद्राभिषेक और चांदी के सिक्के का अर्पण होगा।
उज्जैन | श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाकाल मंदिर धनतेरस पूजा के साथ दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार सुबह 9 बजे से नंदी हॉल में विशेष महापूजा शुरू हुई। यह पूजा करीब एक घंटे चलेगी।
पूजन में भगवान महाकालेश्वर के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों की आराधना होगी। मंदिर के पुजारी और पुरोहित परंपरा के अनुसार यह आयोजन कर रहे हैं।
पूजा का पूरा क्रम
सबसे पहले भगवान गणेश की आराधना होगी। उसके बाद माता महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा।
दोनों पूजन पूरे होने पर भगवान महाकालेश्वर का पंचामृत अभिषेक होगा, फिर रुद्राभिषेक। पुरोहित समिति के पुजारी विधि-विधान से यह आयोजन संपन्न कराएंगे।
चांदी के सिक्के की परंपरा
इस बार धनतेरस की पूजा में भगवान महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित किया जाएगा। पुजारी महाकाल, धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का विधिवत पूजन-अभिषेक करेंगे।
हिंदू धर्म में धनतेरस पर चांदी और अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदने और उनका पूजन करने की परंपरा है। चांदी को शुभता और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- पूजा नंदी हॉल में शुक्रवार सुबह 9 बजे से शुरू हुई
- अवधि करीब एक घंटे की है
- क्रम: गणपति पूजन, महालक्ष्मी पूजन, पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक
- महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित होगा
- धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का भी पूजन-अभिषेक होगा
किस भावना से हो रही है पूजा
पुरोहित समिति के अध्यक्ष लोकेश व्यास के अनुसार, यह पूजा जनकल्याण और विश्व कल्याण की भावना से की जा रही है। इसमें केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि नहीं, सभी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना भी शामिल है।
धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना का विशेष महत्व है। महाकाल मंदिर में यही परंपरा निभाई जा रही है।





